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387 Views 2020-07-02 04:32:00

सावन में शिव पूजा: सावन में शिवलिंग पर इस बिल्वपत्र मंत्र के साथ चढ़ाए बेलपत्र

सावन की शुरुआत होते है ही मंदिरों में भक्तों का तांता लग जाता है। भोले के भक्त उनको प्रसन्न करने के लिए अनुष्ठान, अभिषेक आदि कई जतन करते हैं। इस बार सावन महीने की शुरुवात ही सोमवार के दिन से हुआ है। सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है। वहीं, सावन 2020 की समाप्ति भी सोमवार के दिन ही हो रही है।

2020 के सावन में इन तारीखों में पड़ रहें हैं सोमवार

पहला सोमवार – 06 जुलाई 2020
दूसरा सोमवार – 13 जुलाई 2020
तीसरा सोमवार – 20 जुलाई 2020
चौथा सोमवार – 27 जुलाई 2020
पांचवा सोमवार – 03 अगस्त 2020

इसके अलावा सावन की मासिक शिवरात्रि 18 जुलाई को मनाई जाएगी

सावन में भगवान शिव को विशेष रूप से बिल्वपत्र चढ़ाए जाते हैं, जानते हैं कैसे किस मंत्र का जाप करें –
बिल्व पत्र चढ़ाने का मंत्र ( Bilvapatra Mantra)
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम् ।
त्रिजन्म पापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥
-त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च अच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः ।
तव पूजां करिष्यामि एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥
-सर्वत्रैलोक्यकर्तारं सर्वत्रैलोक्यपालनम् ।
सर्वत्रैलोक्यहर्तारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥
-नागाधिराजवलयं नागहारेण भूषितम् ।
नागकुण्डलसंयुक्तं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥
-अक्षमालाधरं रुद्रं पार्वतीप्रियवल्लभम् ।
चन्द्रशेखरमीशानं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥
-त्रिलोचनं दशभुजं दुर्गादेहार्धधारिणम् ।
विभूत्यभ्यर्चितं देवं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥
-त्रिशूलधारिणं देवं नागाभरणसुन्दरम् ।
चन्द्रशेखरमीशानं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥
-गङ्गाधराम्बिकानाथं फणिकुण्डलमण्डितम् ।
कालकालं गिरीशं च एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥
-शुद्धस्फटिक सङ्काशं शितिकण्ठं कृपानिधिम् ।
सर्वेश्वरं सदाशान्तं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥
-सच्चिदानन्दरूपं च परानन्दमयं शिवम् ।
वागीश्वरं चिदाकाशं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥
-शिपिविष्टं सहस्राक्षं कैलासाचलवासिनम् ।
हिरण्यबाहुं सेनान्यं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥
-अरुणं वामनं तारं वास्तव्यं चैव वास्तवम् ।
ज्येष्टं कनिष्ठं गौरीशं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥

इन मंत्रो के द्वारा भगवान भोले नाथ को प्रसन्न कर सकते हैं एवं बिल्वपत्र चढ़ा सकते हैं। अगर इन मंत्रो का पाठ करने में असुविधा हो तो भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नम: शिवाय’ का जाप करते हुए भी बिल्वपत्र चढ़ा सकते हैं।

सावन इसलिए है विशेष भगवान शिव की पूजा के लिए –

पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने लिए इसी माह में तपस्या की थी इसी कारण से आज भी महिलाएँ अच्छा जीवन साथी पाने के लिए सावन में पूजा पाठ करती हैं। भगवान शिव को भी इसलिए ही यह महिना बहुत प्रिय है।

शिव के अन्य इन मंत्रो का भी स्मरण कर सकते हैं –

ओम साधो जातये नम:।।
ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।।
ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।।

भगवान शिव को ऐसे करें प्रसन्न-

भगवान शिव का अभिषेक जल या गंगाजल से किया जाता है, इसके साथ दूध, दही, घी, शहद, चने की दाल, सरसों तेल, काले तिल, आदि कई सामग्रियों से अभिषेक की विधि प्रचलित है। इस सामग्री से जलाभिषेक करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

सावन के महीने में कैसा भोजन करें ?

भगवान शिव की आराधना करने वाले भक्तों को सभी प्रकार के तामसिक भोजन माँस, मदिरा, लहसुन, प्याज अधिक तेल मिर्च मसाले दार भोजन से परहेज करना चाहिए।

हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, कच्चा दूध, दही आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद और स्वास्थ्य के अनुसार भी इस बारिश का मौसम शुरू होते ही इनमें कीटाणु एवं कई जीव जंतु पनप जाते हैं इसलिए इनका सेवन अस्वास्थ्यकर हो जाता है।

सावन में शिवलिंग पर क्यों चढ़ाते हैं दूध ? ( Reason Behind offering Milk to Shivling)

जब समुद्र मंथन हुआ तो उसमें से निकलने वाले विष का सेवन करके संपूर्ण सृष्टि को बचाया था। तभी से जितनी भी विषैली वस्तुएँ इस धरती पर होती है उनके प्रभाव से बचने के लिए शिवलिंग पर अर्पित कर दिया जाता है। सावन में बारिश की शुरुआत के साथ ही कई छोटे छोटे जीव उत्पन्न हो जाते हैं जो कच्चे दूध में भी उत्पन्न हो जाते हैं। इसलिए बारिश के मौसम में दूध और इससे बने उत्पादों का सेवन नहीं करना चाहिए। भगवान शिव को ये दूध अर्पण करके उसके विषैले प्रभाव से बचा जा सकता है।

सावन में पूजा करने के लिए माता पार्वती की ये व्रत कथा पढ़ें (Sawan Vrat Katha)

जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। देवी सती ने अपने दूसरे जन्म में पार्वती के रूप में हिमाचल और रानी मैना के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस जन्म में भी भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए पूरे सावन महीने में निराहार रह कर कठोर तप किया। इससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह किया। इसी कारण से श्रावण मास भगवान शिव को अति प्रिय है एवं इस महीने किये जाने वाले पूजा कर्म से भगवान शिव भक्तों को मनवांछित फल देते हैं।

भक्तों की पीड़ा को हरने वाले भगवान शिव हर शक्ति के दाता है। इस सम्पूर्ण सृष्टि के आदि देव भोलेनाथ की कृपा से ग्रह दोष, नकारात्मक शक्तियों के कारण होने वाले दुष्प्रभाव आदि से बचा जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र भी शिव की महिमा को अपरम्पार मानता है।

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