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584 Views 2020-04-08 10:00:49

कालसर्प दोष के निवारण के लिए अपनाएँ ये 8 उपाय

कुंडली में ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के कारण कुछ विशेष योग बन जाते हैं जो कभी शुभ तो कभी अशुभ प्रभाव पैदा कर सकते हैं। अशुभ प्रभाव होने पर कुंडली में ग्रहों की इन स्थितियों को दोष कहा जाता है। ऐसा ही एक दोष है काल सर्प दोष।

कब होता है काल सर्प दोष ?

जब सूर्यादि सातों ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाते हैं तो इसे कालसर्प योग माना जाता है। राहू को सर्प के मुख और केतु को सर्प के पूँछ के प्रतीक के रूप में माना जाता है। कुंडली में इस योग की उपस्थिति के कारण जीवन में कई उतार –चढ़ाव और संघर्ष देखने को मिल सकते हैं। अगर कुंडली में कुछ और शुभ प्रभाव वाले योग हों तो जातक को उच्च पद तो मिल जाता है लेकिन उसको इस सफलता को पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।


Courtesy: indiaMART

काल सर्प दोष के लक्षण और प्रभाव:

  1. 1. मानसिक अशांति और अनिर्णय की स्थिति जिससे महत्वपूर्ण कार्यों में देरी हो जाती है
  2. 2. अनावश्यक रूप से चिंतित रहना
  3. 3. आत्मविश्वास की कमी
  4. 4. स्वास्थ्य में गिरावट और जीवन काल में कमी।
  5. 5. परिवार और रिश्तेदारों का लगाव कम या कोई समर्थन नहीं
  6. 6. करियर में नुकसान, धन की हानि
  7. 7. अकेलेपन की भावना जिससे मानसिक अशांति

लक्षण –

  1. 1. इस दोष के साथ व्यक्तियों को सपनों में मृत लोगों की छवियां दिखाई देती है। ये उनके पूर्वज या हाल ही में निधन हो चुके परिवार के सदस्य हो सकते है।
  2. 2. जल स्त्रोतों या घर के बारे में सपने
  3. 3. साँप घिरे होने और साँप के काटने का बड़ा भय
  4. 4. ऊंचाई वाले स्थानों और अकेलेपन का डर

हालाँकि इस दोष का प्रभाव सभी जातकों के लिए अलग-अलग होता है क्योंकि जातक की कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों के प्रभाव के कारण भी इस दोष का प्रभाव कम हो सकता है।

क्या करें अगर कुंडली में है काल सर्प दोष ?

ग्रहों की अशुभ स्थितियां केवल आपको आने वाली परेशानियों के आगाह करती हैं। ज्योतिष विज्ञान में हर तरह की परेशानी के लिए उपाय दिए गए हैं जिनको करने से आपको इन परेशानियों में लाभ मिलता है। किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से सलाह लेकर कुंडली विश्लेषण अवश्य करवाना चाहिए।

ये करें उपाय –

विशेषज्ञों काल सर्प योग के असभ्य प्रभाव को कम करने के उपाय बताएं है। उनमें से कुछ नीचे बताये गये है –

  1. 1. ओम नमः शिवाय का जप करने या रोजाना कम से कम 108 बार महामृत्युजंय जप को करने से इस योग के खराब प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।
  2. 2. प्रत्येक रविवार को को पीपल के पेड़ को पानी दें।
  3. 3. नाग देवता की पूजा या नाग पंचमी को ज्योतिषी सलाह के आधार पर विधि विधान के साथ व्रत करें
  4. 4. भगवान कृष्ण की पूजा करें और पंचमी या शनिवार को नदी में ग्यारह नारियल अर्पित करें लाभ होगा
  5. 5. धातु से बनी हुई नाग-नागिन के जोड़े को नदी में प्रवाहित करें या मंदिर में भी अर्पण कर सकते हैं।
  6. 6. श्राद्ध अमावस्या या सर्वपितृ अमावस्या के दिन इस दोष के प्रभाव से पीड़ित लोगों के लिए श्राद्ध पूजा करना लाभ दायक होता है।
  7. 7. श्राद्ध अमावस्या या सर्वपितृ अमावस्या के दिन इस दोष के प्रभाव से पीड़ित लोगों के लिए श्राद्ध पूजा करना लाभ दायक होता है।
  8. 8. महामृत्युंजय मंत्र की एक माला रोज करें। इससे सुख-शांति बढ़ेगी और रुके हुए काम शीघ्र होने लगते हैं।

इसके निवारण के लिए, विशेषज्ञ से परामर्श लेने की आवश्यकता होती है। कर्म इस योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं यह हमारे द्वारा पूर्व जन्मों में किये गए बुरे परिणामों का नतीजा हो सकता है इसलिए हमेशा अच्छे कर्म करते रहना चाहिए।

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