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1876 Views 2019-12-31 12:49:14

मोरपंख से होंगे नवग्रह के अशुभ दोष दूर, जानिए कैसे

पौराणिक धर्म ग्रंथो और लौकिक मान्यताओं में भी मोर को पवित्र पक्षी माना गया है। मोरपंख को तो स्वयं भगवान कृष्ण ने अपने मुकुट में धारण किया। मोर के बारे में मान्यता है कि नकारात्मक शक्तियों को पहले ही अनुभव कर लेता है और उसके दुष्प्रभाव को बचा कर रखता है।

कुंडली के अशुभ दोषों को दूर करने के लिए भी मोरपंख का उपयोग किया जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माना जाता है कि मोरपंख में सभी नवग्रह का वास होता है जिनके उपाय के लिए इसकी विशेष तरीकों से पूजा अर्चना के द्वारा अशुभ दोषों को दूर किया जा सकता है।

ज्योतिष शास्त्र में मोर पंखों को लेकर कई सारे उपाय बताये गए हैं। वास्तुदोष को दूर करने के लिए भी मोर पंख को लेकर उपाय वास्तु शास्त्र (vastu consultant in Gurgaon) में दिए गए हैं साथ ही ये कुंडली के दोषों को भी दूर करता है।

पढ़िए मोरपंख से जुड़े कुछ उपाय :

  • घर के मुख्य द्वार पर अगर वास्तुदोष (vastu consultant in Gurgaon) हों तो तीन मोरपंख स्थापित करना चाहिए।
  • राहु के लिए : सूर्योदय से पूर्व शनिवार को दो मोर पंख लेकर आएं और उन पर भूरे रंग का धागा बाँध दें। थाली में इन पंखों के साथ दो सुपारियाँ रखें और गंगाजल छिडकें। अब 108 बार इस मन्त्र का जाप करें ‘ॐ राहवे नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ चौमुखा दीपक जलाएं और राहु को अर्पित करें। मीठा प्रसाद भी चढ़ा सकते हैं।
  • केतु के लिए : सूर्यास्त के बाद शनिवार को एक मोरपंख लायें जिस पर एक धागा स्लेटी रंग का बांधे । अब थाली में एक सुपारी लेकर मोर पंख भी रखें और गंगाजल का छिडकाव करें। अब नीचे लिखे मन्त्र का 108 बार जाप करें ‘ॐ केतवे नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ दो कलश जल से भरकर केतु को अर्पण करें और फलों का प्रसाद अर्पित करें।
  • सूर्य के लिए सूर्य के उपाय के लिए रविवार के लिए नौ मोरपंखो में महरून रंग का धागा बांधे। थाली में नौ सुपारियों के साथ इन पंखो को रखें और रविवार के दिन नौ मोर पंख लेकर आएं और पंख के नीचे मैरून रंग का धागा बांध लें। इसके बाद एक थाली में पंखों के साथ नौ सुपारियां रखें और गंगाजल का छिडकाव करें। साथ ही 108 बार इस मन्त्र का जाप करें- ‘ॐ सूर्याय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ और सूर्य को दो नारियल भी अर्पित भी करें।
  • चंद्र के लिए : आठ मोर पंख लेकर आएं और मोरपंख के नीचे की और सफ़ेद धागा बाँध लें। थाली में आठ सुपरियों के साथ इन पंखो को रखें। अब गंगा जल छिडकते हुए इस मन्त्र का 108 बार जाप करें। ( सोमवार को करें ये उपाय ) ‘ॐ सोमाय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ पान के पांच पत्तों और बर्फी का प्रसाद चन्द्रमा को अर्पित करें।
  • मंगल के लिए : सात मोर पंख मंगलवार को लेकर आएं जिनपर लाल धागा बाँध लें। थाली में भी सात ही सुपारियाँ पंखो के साथ रखें और 108 इस मन्त्र का गंगाजल के छिडकाव करने के बाद जाप करें ‘ॐ भू पुत्राय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ बूंदी का प्रसाद चढ़ाएं। पीपल के दो पत्तों पर चावल रख कर मंगल ग्रह को अर्पण करें।
  • बुध के लिए : छ: मोर पंख बुधवार को लेकर आयें और हरे रंग का धागा इनके नीचे की और बांधे। एक थाली में छ: सुपारियाँ इन मोरपंख के साथ रखें और गंगाजल का छिड़काव करें। 108 बार इस मंत्र का जप करें। ‘ॐ बुधाय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ यहाँ फल के रूप में जामुन अर्पित करें और प्रसाद के लिए केले के पत्ते में मीठी रोटी का भोग चढ़ाएं।
  • गुरु के लिए : गुरुवार को पांच मोर पंख लेकर आएं और पीले रंग के धागे से नीचे की और बाँध लें। पांच सुपारियाँ और ये पंख रख कर गंगाजल से छिड़काव करें। इस मन्त्र का 108 बार जाप करें और ब्रहस्पति का ध्यान करें। ‘ॐ बृहस्पते नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ बृहस्पति को 11 केले अर्पित करें । प्रसाद के रूप में बेसन का व्यंजन बना कर अर्पित करें।
  • शुक्र के लिए : शुक्रवार को चार मोर पंख लेकर आएं और इन सभी मोरपंखों पर नीचे की ओर गुलाबी रंग का धागा बांधे। एक पात्र में इन पखों के साथ चार सुपारियाँ रखें और इन सभी पर गंगाजल का छिड़काव करें। ‘ॐ शुक्राय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ इस मन्त्र का 108 बार जाप करें। तीन की संख्या में मीठे पान अर्पित करें। गुड़ और चने का प्रसाद चढ़ाएं।
  • शनि के लिए : तीन मोर पंख शनिवार के दिन लायें । इन पंखो के नीचे की ओर काला धागा बाँध लें। एक थाली में तीन सुपारियाँ लेवें और मोरपखों को भी इनके साथ रख देवें। गंगाजल से इनका शुद्धिकरण करें। ‘ॐ शनैश्वराय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ इस मन्त्र का 108 बार जाप करें। शनिदेव को तेल के दीपक अर्पण करें। प्रसाद के रूप में गुलाब जामुन का प्रसाद चढ़ाएं।

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