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560 Views 2019-05-30 06:38:03

जानिये, गणेश चतुर्थी पर पूजा विधि और चंद्र दर्शन नहीं करने का कारण

जानिये, गणेश चतुर्थी पर पूजा विधि और चंद्र दर्शन नहीं करने का कारण

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। भगवान गणेश जी को सभी देवी—देवताओं में सबसे पहले पूजा जाता है और इनकी विधिवत पूजा अर्चना से ​विध्न—बाधाएं दूर होकर कार्य सफल होते हैं। जानें,इस गणेश चतुर्थी पर किस विधि विधान से गणपति को प्रसन्न करें और चंद्रमा के दर्शन क्यों नहीं करें।

गणेश चतुर्थी पूजा मुहूर्त 2019

गणेश चतुर्थी तिथि सोमवार, 2 सितंबर 2019
चतुर्थी तिथि आरंभ 2 सितंबर, 04:56
चतुर्थी तिथि समाप्त 3 सितंबर, 01:53
चंद्र दर्शन से बचने का समय 2 सितंबर,08:55 से 21:05 तक
मध्याह्न गणेश पूजा 11:05 से 13:36 तक

पूजा का नियम – गणेश-चतुर्थी के विशेष दिन भगवान गणेश की प्रातःकाल, मध्याह्न और सायंकाल में किसी भी समय पूजा की जा सकती है। मगर इस दिन मध्याह्न के समय गणेश-पूजा को सर्वश्रेष्ठ माना है और इस समय को गणेश-चतुर्थी पूजा मुहूर्त कहा जाता है।

  • गणेश चतुर्थी के दिन ब्रह्म मूहर्त में उठकर स्नान आदि से शुद्ध होकर साफ कपड़े पहनने चाहिए। इस दौरान आसन पर बैठकर अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ कर गणेश जी के पूजन की शुरूआत करनी चाहिए।
  • इस दिन गणपति की नई प्रतिमा को घर में विधि विधान के साथ स्‍थापित करना चाहिए। पंचामृत से ​प्रतिमा को स्नान कराने के बाद अक्षत, दूर्वा,सुपारी,हल्दी,पान आदि पूजा सामग्री अर्पित करनी चाहिए और मोदक के लड्डू का प्रसाद चढाकर कपूर,घी का दिया जलाकर पूजा और आरती करें।

भूलकर नहीं करें चंद्र दर्शन – धर्म शास्त्रों की मान्यता अनुसार गणेश चतुर्थी पर चांद देखने से दोष लगता है।इस दिन अगर कोई व्यक्ति चंद्रमा के दर्शन कर ले तो भविष्य में कोई झूठा दोष या आरोप झेलना पड सकता है।

यह है पौराणिक कथा – धर्म ग्रंथों में वर्णित एक कथा के अनुसार गणेश जी के सूंड वाले मुख को देखकर चांद को हंसी आ गयी ​थी जिससे गणेश जी बहुत नाराज़ हो गये और उन्होंने चांद को श्राप देते हुए कहा कि तुम्हें अपनी खूबसूरती पर बहुत घमंड है इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन जो भी तुम्हारे दर्शन करेगा उसे दोष झेलना पडेगा इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन चाँद को देखने से मना किया जाता है।

गणेशोत्सव समापन – भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने के बाद लगातार दस दिनों तक पूजा अर्चना के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की विदाई होती है और लोग नृत्य करते हुए गणेश प्रतिमा को किसी पवित्र तालाब,नदी पर ले जाकर विसर्जन कर देते हैं और गणेशोत्सव का समापन होता है।

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