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2560 Views 2019-02-07 06:52:02

जीवन में शुभता व ढृढता का प्रतीक है महाशिवरात्रि

Mahashivratri Pooja vidhi in hindi

हिन्दू धर्म में भगवान शिव सबसे ज्यादा लोकप्रिय देवता है और इनकी पूजा प्रमुख तौर पर की जाती है। ​धर्मशास्त्रों में भी शिव पूजा को कल्याणकारी व सबसे सरल बताया है और महाशिवरात्रि शिव जी का सबसे बडा त्यौहार है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है।

महाशिवरात्रि 2020

तिथि 21 फरवरी
निशिथ काल पूजा समय 24:08 से 25:00
पारण समय प्रात: 06:57 से दोपहर 03:23 (22 फरवरी)
चतुर्दशी तिथि आरंभ सांय 05:20 बजे से (21 फरवरी)
चतुर्दशी तिथि समाप्त सांय 07:02 तक (22 फरवरी)

इस खास दिन शिव भक्त मंदिरों में पहुंचकर शिवलिंग पर बेल पत्र,भांग धतूरा, फूल, दूध,प्रसाद आदि चढाकर विशेष रूप से पूजा अर्चना कर व्रत तथा रात्रि में जागरण करते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु कावड़ के जरिये गंगाजल भी लाकर शिवलिंग स्नान करवाते हैं।

इस तरह पूजा कर शिव को करें प्रसन्न

महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव परिवार का पूजन से पहले शुरूआत में सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा अराधना किया जाना आवश्यक होता है।

स्वच्छ जल में गंगाजल की कुछ बूंद मिलाकर साथ में दूध,दही आदि पंचामृत शिवलिंग पर चढाया जाना चाहिए। इसके बाद ओम नम: शिवाय का जाप कर शिवलिंग पर बेल पत्र चढाने चाहिए और प्रसाद चढाकर धूपबत्ती से पूजा के बाद का शिव पुराण का पाठ,महामृत्युंजय मंत्र, पंचाक्षर मंत्र आदि का जाप किया जा सकता है।

धर्म शास्त्र अनुसार शिवरात्रि का पूजन ‘निशीथ काल’ में करना अति उत्तम माना जाता है। इस दिन शिव के भक्त रात्रि के चारों प्रहरों में से अपनी सुविधानुसार कभी भी पूजन कर सकते हैं।इस दिन सच्चे मन से शिव की पूजा करने पर वह जल्दी प्रसन्न होकर इंसान की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण करते है।

पूजा में शामिल नहीं करें ये चीज

धर्म शास्त्र अनुसार महाशिवरात्रि पर शिव जी की पूजा के दौरान कुछ चीजों को शामिल कर उपयोग में लाना वर्जित होता है अर्थात् इन्हें शिव पूजा में निषेध किया गया है और अगर इन चीजों को शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है तो महादेव नाराज भी हो सकते हैं।

  • नारियल को देवी लक्ष्‍मी का रूप माना है इसलिए भगवान शिव की पूजा में छोड़कर अन्य सभी देवी—देवताओं की पूजा में नारियल का उपयोग होता है।
  • केतकी का फूल भी भगवान शिव की पूजा में नहीं चढ़ाया जाता है। इसे भूलकर भी नहीं चढाया जाना चाहिए।
  • भगवान महादेव की पूजा में शंख का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है और शंख के पानी का भी उपयोग नहीं करना चाहिए।
  • शिव जी की पूजा में कच्चे दूध का उपयोग किया जाता है और पैकेट वाले दूध का उपयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
  • इसके अलावा हल्दी का भी कभी उपयोग शिव पूजा में नहीं करना चाहिए।
  • इन चीजों का ध्यान कर शिव पूजा की जानी चाहिए।

शिव अराधना से कुण्डली में चंद्रमा होगा मजबूत

धर्म ग्रंथों के अनुसार चन्द्रमा को शिव जी ने अपने मस्तक पर धारण किया हुए हैं और अगर व्रत व पूरी श्रद्वा भावना के साथ महादेव की पूजा की जाती है तो उस इंसान की कुण्डली में चंद्रमा को मजबूती मिलती है। ज्योतिष में चंद्रमा को इंसान के मन का कारक बताया है जिससे मन मजबूत होने पर इच्छाशक्ति भी बढती है और कार्यों में सफलता मिलती है।

पूजा बाद प्रार्थना

पूजा के बाद भक्तों को भोलेनाथ से क्षमा मांगते हुए प्रार्थना भी करनी चाहिए कि हे प्रभु आप इस पूजा को स्वीकार कीजिए और अपनी कृपा भी बनाए रखें। इस तरह विधिपूर्वक महाशिवरात्रि पर सच्चे मन से पूजा करने से जल्दी ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने लगेंगी।

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