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821 Views 2018-03-09 06:50:29

इस साल आठ दिन की होगी नवरात्रि, जाने घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

नौ महामंत्रों की अमोघ शक्तियां जिससे नए साल पर मिलेगा मां दुर्गा का अशीर्वाद। नवरात्रा पर बरसेगा अमृत इस बार। मां देने वाली हैं भक्तों के द्वार पर दस्तक, खुलने वाला है खुशियों का द्वार और शक्ती की भक्ती में डूब जाएगा पूरा संसार। शक्ती की उपासना के सबसे बड़े पर्व के साथ ही शुरू हो रहा है संवत 2075। हिन्दू पंचाग के अनुसार चैत्र नवरात्रा से ही नए संवत का आरंभ होता है। इस नवरात्रि के दिनों में किस तरह पूजा अर्चना करें व किस प्रकार उन्हें अपने घर लाएं व इससे जुड़े वास्तु के टिप्स आईए जानते हैं।

शुभ मुहूर्त व तारीख

इस वर्ष 18 मार्च दिन रविवार से शुरू है नवरात्रा व 25 मार्च तक है। पूजा का समय- 6:36 से 7:56

कुछ वास्तु टिप्स
  • घर से नाकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए घर के मुख्य दरवाजे पर स्वास्तिक का निशान बनाना चाहिए।
  • इसके अलावा श्री गणेश का चित्र भी लगाएं, इससे कार्य में आने वाली तमाम तरह की बधाएं दूर होती है।
  • नवरात्र काल में यदि माता की स्थापना चंदन की चौकी या पट पर की जाए तो यह अत्यंत शुभ रहता है, क्योंकि वास्तुशास्त्र में चंदन को अत्यंत शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना गया है जिससे वास्तुदोषों का शमन होता है।
  • घर में कांच के बर्तन टूटने पर किसी सफाई कर्मचारी को नमक देने से आने वाली मुसीबत टल जाएगी ऐसी धारणा है।
  • नवरात्र के दौरान आम और अशोक के पत्तों की माला बनाकर अपने घर के मुख्य दरवाजे पर बांधना शुभ माना जाता है। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
  • इन दिनों घर के मुख्य द्वार पर लक्ष्मी जी के पैर के निशान बनाने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बानी रहती है।
  • घर की परेशानी और नकारात्मकता दूर करने के लिए नवरात्रि में किसी भी एक दिन लक्ष्मी मंदिर जाएं और केसर के साथ पीले चावल को मंदिर में चढ़ाएं। ऐसा करने से घर की बाधाएं दूर होती है।
अखंड ज्योति को रखने की सही दिशा
  • नवरात्रि में घट स्थापना के साथ ही कुछ लोग अखंड ज्योति का भी संकल्प लेते हैं।
  • उत्तर पूर्व यानि ईशान कोण को देवी-देवताओं का स्थान माना जाता है।
  • इसी दिशा में माता की प्रतिमा और घट की स्थापना करना शुभ होता है।
  • पूजा वाली जगह के ऊपर कोई गंदे कपड़े आदि ना रखें।
  • अखंड ज्योति पूर्व दक्षिण कोण में ही रखना शुभ माना गया है।
  • पूजा के समय इसका मुख पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए।

यह सारे वह उपाय हैं जिन्हें अमल में लाकर आप नवरात्र पर कर सकेंगे मां दुर्गा को प्रसन्न होगी खुशियों की बारिश।

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